आगे बढ़ाएँ
हर कोई सुखी और शांत जीवन का हकदार है। ज्ञान उसे देने का एक तरीका है।
यदि इस पुस्तक ने आपकी मदद की है, तो आप इसे पुराने तरीके से, देकर, चुका सकते हैं।
किसी जूझ रहे व्यक्ति को एक प्रति, या एक अध्याय, दें; माँगे जाने का इंतज़ार न करें।
किसी स्कूल, पुस्तकालय, क्लिनिक के प्रतीक्षा कक्ष, गाँव के वाचनालय या पूजा-स्थल में एक मुद्रित प्रति रखें।
किसी बुज़ुर्ग या बच्चे के साथ एक अध्याय ज़ोर से पढ़ें।
किसी सहायता समूह या अकेले रहने वाले पड़ोसी के लिए एक घंटा स्वयंसेवा करें।
लेखक को लिखकर बताएँ कि क्या अस्पष्ट था, ताकि अगले पाठक को यह आसान लगे।
श्रद्धा, उदारता, विनम्रता, आदर और समझ के साथ दें।
संस्कृत पाठ:
श्रद्धया देयम् । अश्रद्धयाऽदेयम् । श्रिया देयम् । ह्रिया देयम् । भिया देयम् । संविदा देयम् ॥
उच्चारण: shraddhaya deyam | ashraddhaya ’deyam | shriya deyam | hriya deyam | bhiya deyam | samvida deyam ||
अनुवाद: श्रद्धा से दो; बिना श्रद्धा के मत दो। उदारता से दो; विनम्रता से दो; आदर के साथ दो; समझ के साथ दो।
दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ: गुरु स्नातक होते शिष्य को इसी निर्देश के साथ जीवन में भेजते हैं। अपना समय, इस पुस्तक की अपनी प्रति और अपना ध्यान स्नेह और विनम्रता से साझा करें, दूसरे व्यक्ति को क्या चाहिए इसकी वास्तविक समझ के साथ, और कभी भाषण के रूप में या कीमत के टैग के साथ नहीं।
संदर्भ — तैत्तिरीय उपनिषद 1.11.3 (गुरु का विदाई उपदेश)
सभी 35 अध्याय · असल ज़िंदगी की 183 कहानियाँ · मन के लिए 61 हिंदू श्लोक · सबके लिए मनोविज्ञान – मानसिक कल्याण श्रृंखला