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उन्नत मनोवैज्ञानिक समस्याएँ

सही द्वार खोलने वाले नाम : विलगाव, ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD), खान-पान के विकार, व्यक्तित्व के ढर्रे और नशीले पदार्थ उपचार-योग्य हैं। ये चरित्र पर फ़ैसले नहीं हैं।

22.1 विलगाव (डिसोसिएशन)

विलगाव विचारों, भावनाओं, स्मृतियों या पहचान की भावना से कट जाने की मानसिक प्रक्रिया है। यह सामान्य से लेकर रोगात्मक तक एक स्पेक्ट्रम पर होता है।

सामान्य: दिवास्वप्न; हाईवे-सम्मोहन (गाड़ी चलाते हुए खोया रहना); किसी किताब या फ़िल्म में डूब जाना।

रोगात्मक: डीपर्सनलाइज़ेशन (शरीर से कटा हुआ महसूस करना); डीरियलाइज़ेशन (संसार अवास्तविक लगना); स्मृति में खाली जगहें (डिसोसिएटिव एम्नीशिया); पहचान का बिखराव — डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (DID)।

डीपर्सनलाइज़ेशन / डीरियलाइज़ेशन डिसऑर्डर

शरीर या विचारों से अलग होने की लगातार भावना; जैसे कोई बाहरी दर्शक हो; संसार अवास्तविक, स्वप्न-जैसा या विकृत लगता है। वास्तविकता की परख बनी रहती है — व्यक्ति जानता है कि यह एक अनुभूति है, तथ्य नहीं।

डिसोसिएटिव एम्नीशिया (विलगाव-जन्य स्मृति-लोप)

महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी याद न कर पाना, आमतौर पर आघात या तनाव से जुड़ा, सामान्य भूलने से अधिक। स्थानीय (कोई विशेष घटना), चयनात्मक (घटना के हिस्से) या सामान्यीकृत (पूरा जीवन) हो सकता है।

डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर (DID)

पहले इसे मल्टिपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहा जाता था। दो या अधिक अलग-अलग व्यक्तित्व-अवस्थाएँ; रोज़मर्रा की घटनाओं, व्यक्तिगत जानकारी या आघात की स्मृति में खाली जगहें। आमतौर पर बचपन के गंभीर आघात से विकसित होता है। विवादास्पद निदान; विशेष मूल्यांकन चाहिए। यह स्किज़ोफ़्रेनिया के समान नहीं है।

कारण: अक्सर आघात, विशेषकर बचपन का आघात; सामना करने का एक तंत्र जो एक हानिकारक ढर्रे के रूप में बना रह सकता है।

उपचार: आघात-जानकार थेरेपी; ग्राउंडिंग; सुरक्षा और स्थिरता बनाना; तैयार होने पर आघातपूर्ण स्मृतियों को सँभालना; DID के लिए एकीकरण-कार्य।

22.2 ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD)

OCD की पहचान जुनूनों (ऑब्सेशन — अनचाहे घुसपैठी विचार) और बाध्यताओं (कम्पल्शन — दोहराए जाने वाले व्यवहार या मानसिक क्रियाएँ) से होती है।

जुनून: घुसपैठी, अनचाहे विचार, छवियाँ या इच्छाएँ जो चिंता पैदा करती हैं; व्यक्ति उन्हें अनदेखा करने या दबाने की कोशिश करता है। विषय: संदूषण, नुकसान, समरूपता, वर्जित विचार।

बाध्यताएँ: चिंता घटाने के लिए किए जाने वाले दोहराए व्यवहार या मानसिक क्रियाएँ; अक्सर अत्यधिक या उस चीज़ से यथार्थ रूप से न जुड़ी जिसे वे रोकने के लिए हैं। उदाहरण: धोना, जाँचना, गिनना, क्रम से रखना, मानसिक अनुष्ठान।

आम विषय

  • संदूषण: कीटाणुओं, गंदगी, रसायनों का डर; धोना, सफ़ाई, बचना।

  • नुकसान: स्वयं या दूसरों को नुकसान पहुँचाने का डर; घुसपैठी हिंसक विचार; जाँचना, आश्वासन, बचना।

  • समरूपता / क्रम: चीज़ों के “बिल्कुल ठीक” होने की ज़रूरत; सजाना, दोहराना।

  • वर्जित विचार: घुसपैठी यौन, धार्मिक या आक्रामक विचार; मानसिक अनुष्ठान, प्रार्थना, आश्वासन।

  • ज़िम्मेदारी: किसी बुरी घटना के लिए ज़िम्मेदार होने का अत्यधिक डर; जाँचना, सूचियाँ, आश्वासन।

उपचार

  • एक्सपोज़र एंड रिस्पॉन्स प्रिवेंशन (ERP): सर्वोत्तम मानक। बाध्यताएँ किए बिना डर का सामना करें; सीखें कि चिंता घटती है; अनिश्चितता के प्रति सहनशीलता बनाएँ।

  • दवाएँ: SSRIs, अक्सर अवसाद से अधिक ख़ुराक में।

  • ACT: विचारों में उलझे बिना उन्हें स्वीकार करना।

  • सहायता-समूह: शर्म और अकेलापन घटाते हैं।

22.3 खान-पान के विकार

खान-पान के विकार गंभीर मानसिक-स्वास्थ्य स्थितियाँ हैं जिनमें खाने का बिगड़ा व्यवहार और भोजन, वज़न तथा शरीर की छवि में डूबे रहना शामिल है। इनके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों पहलू होते हैं और ये चिकित्सीय रूप से ख़तरनाक हो सकते हैं।

एनोरेक्सिया नर्वोसा

एनोरेक्सिया वाले लोग बहुत ही कम खाते हैं और ख़तरनाक रूप से दुबले हो जाते हैं। वे वज़न बढ़ने से बहुत डरते हैं, अपने शरीर को गलत ढंग से देखते हैं और अक्सर अत्यधिक व्यायाम करते हैं। यह हृदय, हड्डियों और प्रजनन-क्षमता को नुकसान पहुँचा सकता है, और इसकी मृत्यु-दर किसी भी मानसिक बीमारी से अधिक है। उपचार पहले शरीर को सुरक्षित बनाता है, फिर स्वस्थ भोजन को फिर से स्थापित करता है और थेरेपी जोड़ता है; किशोरों के लिए परिवार-आधारित उपचार सबसे अच्छा रहता है।

बुलिमिया नर्वोसा

नियंत्रण खोने की भावना के साथ बार-बार अत्यधिक खाना; प्रतिपूरक व्यवहार; आत्म-मूल्यांकन पर शरीर के आकार और वज़न का अनुचित प्रभाव; अक्सर सामान्य या सामान्य से अधिक वज़न। जटिलताएँ: इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, दाँतों का क्षरण, ग्रासनली और हृदय की समस्याएँ। उपचार: CBT-E, SSRIs, पोषण-परामर्श।

अत्यधिक भोजन-विकार (बिंज-ईटिंग डिसऑर्डर)

नियमित प्रतिपूरक व्यवहारों के बिना बार-बार अत्यधिक खाना; तेज़ी से खाना, असुविधाजनक रूप से पेट भरने तक, भूख न होने पर भी; बाद में घृणा, अवसाद या अपराध-बोध; अक्सर मोटापे तक ले जाता है। उपचार: CBT, इंटरपर्सनल थेरेपी, कभी-कभी दवाएँ।

अवॉइडेंट/रेस्ट्रिक्टिव फ़ूड इनटेक डिसऑर्डर (ARFID)

रुचि की कमी, इंद्रिय-संबंधी समस्याओं या परिणामों के डर से सीमित भोजन। शरीर की छवि की चिंताओं से प्रेरित नहीं। कुपोषण तक ले जा सकता है। बच्चों और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम में आम। उपचार: पोषण-सहारा, एक्सपोज़र, परिवार की भागीदारी।

OSFED (अन्य निर्दिष्ट आहार या खान-पान विकार) लक्षण उल्लेखनीय कष्ट पैदा करते हैं पर ऊपर के विकारों के पूरे मानदंड पूरे नहीं करते। फिर भी गंभीर हैं और उपचार की ज़रूरत है।

मूल कारक: आनुवंशिक प्रवृत्ति; दुबलेपन को लेकर सांस्कृतिक दबाव; पूर्णतावाद, कम आत्म-सम्मान; आघात; साथ में चिंता, अवसाद, OCD; पारिवारिक गतिशीलता।

उपचार के सिद्धांत: चिकित्सीय निगरानी; बहु-विषयक टीम (थेरेपिस्ट, आहार-विशेषज्ञ, चिकित्सक, मनोचिकित्सक); मूल मनोविज्ञान पर काम; पोषण-पुनर्वास; किशोरों के लिए परिवार की भागीदारी; सहायता-समूह।

22.4 व्यक्तित्व-विकार

सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के स्थायी ढर्रे जो सांस्कृतिक अपेक्षाओं से भिन्न, अनम्य होते हैं और कष्ट या हानि पैदा करते हैं।

क्लस्टर A (अजीब / सनकी)

  • पैरानॉयड: व्यापक अविश्वास; दूसरों के इरादे बुरे समझना; मन की बात बताने में अनिच्छा; सामान्य टिप्पणियों में छिपे अर्थ खोजना।

  • स्किज़ॉइड: संबंधों से अलगाव; सीमित भावनात्मक अभिव्यक्ति; एकांत पसंद; प्रशंसा या आलोचना के प्रति उदासीन।

  • स्किज़ोटाइपल: संज्ञानात्मक विकृतियों के साथ सामाजिक कमियाँ; अजीब मान्यताएँ, जादुई सोच; असामान्य अनुभूति-अनुभव; सनकी व्यवहार।

क्लस्टर B (नाटकीय / भावुक / अस्थिर)

  • एंटीसोशल: दूसरों के अधिकारों की अनदेखी; धोखेबाज़, आवेगी, आक्रामक; पछतावे की कमी; अक्सर बचपन में आचरण-विकार।

  • बॉर्डरलाइन (BPD): संबंधों, आत्म-छवि, भावनाओं में अस्थिरता; छोड़े जाने का डर; आवेगशीलता; कुछ लोगों में बार-बार आत्मघाती व्यवहार या आत्म-क्षति; दीर्घकालिक ख़ालीपन; तीव्र गुस्सा। DBT सर्वोत्तम मानक थेरेपी है।

  • हिस्ट्रियोनिक: अत्यधिक भावुकता और ध्यान आकर्षित करने की चाह; केंद्र में न होने पर असहज; उथली, तेज़ी से बदलती भावनाएँ।

  • नार्सिसिस्टिक: अपने को महान समझना, प्रशंसा की ज़रूरत, सहानुभूति की कमी; सफलता की कल्पनाएँ; दूसरों का शोषण; नाज़ुक आत्म-सम्मान।

क्लस्टर C (चिंतित / भयभीत)

  • अवॉइडेंट: सामाजिक संकोच, अपर्याप्तता, आलोचना के प्रति अति-संवेदनशीलता; जुड़ाव चाहते हुए भी संपर्क से बचना; अस्वीकृति का डर।

  • डिपेंडेंट: देखभाल किए जाने की अत्यधिक ज़रूरत; अधीनता, चिपके रहना; अलगाव का डर; आश्वासन के बिना निर्णय लेने में कठिनाई।

  • ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (OCPD): व्यवस्था, पूर्णतावाद, नियंत्रण में डूबे रहना; अहं-संगत (“यही मैं हूँ” जैसा लगता है), जबकि OCD अहं-विरोधी होता है; कठोर; काम में डूबा रहना; आराम और संबंधों की उपेक्षा।

उपचार: लंबी अवधि की मनोचिकित्सा; बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (BPD) के लिए डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी (DBT); स्कीमा थेरेपी; मेंटलाइज़ेशन-आधारित उपचार; विशेष लक्षणों के लिए दवाएँ, स्वयं व्यक्तित्व-विकार के लिए नहीं। चुनौतीपूर्ण पर प्रतिबद्धता के साथ उपचार-योग्य।

22.5 नशीले पदार्थों के उपयोग के विकार

नशीले पदार्थ के उपयोग का विकार शराब या ड्रग्स के उपयोग का ऐसा ढर्रा है जो नुकसान या कष्ट पैदा करता है। संकेतों में शामिल हैं: इरादे से अधिक उपयोग; घटाना चाहना पर न कर पाना; पाने, उपयोग करने या उबरने में बहुत समय लगाना; तलब; काम, पढ़ाई या घर में असफल होना; समस्याओं के बावजूद जारी रखना; अन्य गतिविधियाँ छोड़ देना; ख़तरनाक स्थितियों में उपयोग; उसी असर के लिए अधिक मात्रा की ज़रूरत (सहनशीलता); और रोकने पर अस्वस्थ महसूस करना (विदड्रॉल)।

बताए गए पदार्थ: शराब; ओपिऑइड (हेरोइन, दर्द-निवारक लिखी गई दवाएँ); उत्तेजक (कोकीन, मेथएम्फ़ेटामिन, ADHD की दवाएँ); कैनाबिस; शामक (बेंज़ोडायज़ेपीन, नींद की दवाएँ); मतिभ्रमकारी पदार्थ; तंबाकू/निकोटीन।

उपचार: चिकित्सीय निगरानी में विषहरण (डिटॉक्स); पुनर्वास; ओपिऑइड और शराब के लिए दवा-सहायक उपचार; CBT और मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग; सहायता-समूह AA (अल्कोहलिक्स एनॉनिमस), NA (नारकोटिक्स एनॉनिमस), SMART Recovery (सेल्फ़-मैनेजमेंट एंड रिकवरी ट्रेनिंग); दोबारा शुरू होने से रोकथाम; साथ की मानसिक-स्वास्थ्य स्थितियों का उपचार।

चिंतन गतिविधि

  1. इनमें से किन स्थितियों का आपने सामना किया है (स्वयं या दूसरों में)?

  2. इन स्थितियों को समझना कलंक को कैसे घटाता है?

  3. इन समस्याओं से जूझ रहे किसी व्यक्ति से आप क्या कहेंगे?

  4. वे मदद कहाँ ले सकते हैं?

  5. बढ़ावा दिए बिना आप सहायक कैसे बन सकते हैं?

सभी 35 अध्याय · असल ज़िंदगी की 183 कहानियाँ · मन के लिए 61 हिंदू श्लोक · सबके लिए मनोविज्ञान – मानसिक कल्याण श्रृंखला