Source: <https://psychologyforeveryone.in/hi/chapter/3-human-brain-and-nervous-system/>

# मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र

*जहाँ शरीर में मानसिक स्वास्थ्य का पता है : हर विचार का एक पता होता है। पता भाग्य नहीं होता।*

## 3.1 परिचय

मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र सोच, भावनाओं, स्मृति, गति, इंद्रियों, हार्मोन और साँस लेने तथा दिल की धड़कन जैसे स्वचालित शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं। मस्तिष्क की संरचना को समझने से हमें मानसिक स्वास्थ्य समझने में मदद मिलती है।

#### और गहराई से

इसीलिए सिर की चोट के बाद आया नया गुस्सा केवल “रवैया” नहीं है, और पहले सप्ताह की बिना नींद वाली रातें केवल “तनाव” नहीं हैं। सोचने वाला अंग थका हुआ, सूजा हुआ, चोटिल या थायरॉइड हार्मोन से वंचित हो सकता है। मानसिक कल्याण इसी तार-जाल में बसता है। यह केवल एक कहानी नहीं है।

## 3.2 मस्तिष्क के प्रमुख भाग

**चित्र 3.1** *तीन भाग जिनसे आप अक्सर मिलेंगे: सोचने वाला मस्तिष्क, अलार्म और स्मृति।*

**चित्र 3.2** *मस्तिष्क के खंड (लोब) और हर एक की मुख्य ज़िम्मेदारी।*

### फ़्रंटल लोब (मस्तिष्क का अगला भाग)

-

योजना बनाना और व्यवस्थित करना।

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निर्णय लेना।

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आत्म-नियंत्रण और आवेग पर नियंत्रण।

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व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति।

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वाणी का निर्माण (ब्रोका क्षेत्र)।

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समस्या-समाधान।

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विवेक (निर्णय-शक्ति)।

कार्यशील स्मृति और सामाजिक विवेक।

क्लिनिक टिप्पणी। यहाँ क्षति या थकान खराब योजना, रूखी वाणी, या ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखती है जो किसी हानिकारक आवेग को रोक नहीं पाता। यह चोट, उन्माद, नशीले पदार्थों का सेवन या नींद की कमी हो सकती है — हमेशा “बुरा चरित्र” नहीं।

### पैराइटल लोब (मस्तिष्क का ऊपरी-मध्य भाग)

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स्पर्श की अनुभूति।

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स्थान का बोध।

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शरीर की स्थिति का बोध (प्रोप्रियोसेप्शन)।

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दिशा पहचानना और गति का समन्वय।

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संवेदी जानकारी का संसाधन।

स्थान-संबंधी ध्यान।

### टेम्पोरल लोब (मस्तिष्क के किनारे, कानों के पास)

-

सुनना और श्रवण संसाधन।

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स्मृतियाँ बनाना और याद करना।

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भाषा की समझ (वर्निके क्षेत्र)।

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भावनाओं का संसाधन।

-

चेहरों की पहचान।

टेम्पोरल लोब वस्तुओं और चेहरों को पहचानने में भी मदद करता है। जो व्यक्ति अचानक परिचित चेहरों के नाम नहीं बता पाता, उसे प्रेरक भाषण की नहीं, चिकित्सा के द्वार की ज़रूरत है।

### ऑक्सिपिटल लोब (मस्तिष्क का पिछला भाग)

-

दृष्टि और दृश्य संसाधन।

-

रंगों की पहचान।

-

वस्तुओं की पहचान।

-

दृश्य स्मृति।

### लिम्बिक तंत्र (मस्तिष्क के भीतर गहराई में)

-

भावनाएँ (डर, गुस्सा, आनंद)।

-

स्मृति निर्माण (हिप्पोकैम्पस)।

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प्रेरणा और पुरस्कार (एमिग्डाला, न्यूक्लियस एकम्बेंस)।

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अस्तित्व-रक्षा के व्यवहार।

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भावनात्मक स्मृतियाँ।

हिस्से अलग-अलग हैं: हिप्पोकैम्पस — नई घटनात्मक स्मृतियाँ और स्थान के मानचित्र; एमिग्डाला — महत्व और ख़तरे की पहचान, भावनात्मक स्मृति।

क्लिनिक टिप्पणी। आघात और घबराहट इसी इलाक़े का बहुत उपयोग करते हैं। ख़तरा चले जाने के बाद भी अलार्म बज सकता है। थेरेपी और ज़रूरत पड़ने पर दवा यहाँ भी काम करती है और उस फ़्रंटल लोब में भी जो अलार्म को शांत करने की कोशिश करता है।

### सेरिबेलम (मस्तिष्क का पिछला-निचला भाग)

-

संतुलन और समन्वय।

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सूक्ष्म गतियों पर नियंत्रण।

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गति से जुड़ा सीखना।

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कुछ संज्ञानात्मक कार्य।

समय-निर्धारण और समन्वय।

### ब्रेनस्टेम (मस्तिष्क का आधार, मेरुरज्जु से जुड़ा)

-

साँस पर नियंत्रण।

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दिल की धड़कन का नियमन।

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सोने-जागने का चक्र।

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चेतना।

-

महत्वपूर्ण स्वचालित कार्य।

ब्रेनस्टेम बुनियादी काम चलाता रहता है: साँस, दिल की धड़कन और सतर्कता। यह वह मकान-मालिक है जो मोल-भाव नहीं करता। यदि चेतना या साँस विफल हो रही है, तो यह आपातकालीन विभाग का मामला है, परामर्श का नहीं।

## 3.3 तंत्रिका तंत्र

**चित्र 3.3** *तंत्रिका तंत्र कैसे व्यवस्थित है।*

### केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS)

-

मस्तिष्क।

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मेरुरज्जु।

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जानकारी का संसाधन और समन्वय करता है।

### परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS)

-

पूरे शरीर में फैली तंत्रिकाएँ।

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CNS तक और वहाँ से जानकारी ले जाता है।

-

दो विभाग:

-

कायिक (सोमैटिक) तंत्रिका तंत्र: ऐच्छिक गतियाँ।

-

स्वायत्त (ऑटोनॉमिक) तंत्रिका तंत्र: स्वचालित कार्य।

संक्षेप में, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क और मेरुरज्जु है। बाकी सब परिधीय है। कायिक तंत्रिकाएँ उन अंगों को चलाती हैं जिनकी ओर आप इशारा कर सकते हैं। स्वायत्त तंत्रिकाएँ भीतरी अंगों को चलाती हैं।

### स्वायत्त तंत्रिका तंत्र: दो शाखाएँ

#### सिम्पैथेटिक तंत्रिका तंत्र (लड़ो-या-भागो)

-

तनाव या ख़तरे के समय सक्रिय होता है।

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दिल की धड़कन बढ़ाता है।

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पुतलियों को फैलाता है।

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रक्त को मांसपेशियों की ओर मोड़ता है।

-

शरीर को कार्रवाई के लिए तैयार करता है।

#### पैरासिम्पैथेटिक तंत्रिका तंत्र (आराम करो-और-पचाओ)

-

आराम के समय सक्रिय होता है।

-

दिल की धड़कन धीमी करता है।

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पाचन को बढ़ावा देता है।

-

भरने और ठीक होने में सहायता करता है।

-

ऊर्जा बचाता है।

ये दोनों शाखाएँ बिजली के स्विच की तरह नहीं, तराज़ू की तरह काम करती हैं। हाइपोथैलेमस तंत्रिका और हार्मोन नियंत्रण की सीमा पर बैठा है और पिट्यूटरी को बाकी अंतःस्रावी तंत्र की ओर निर्देशित करता है — जिसमें HPA तनाव-अक्ष और कोर्टिसोल शामिल हैं।

क्लिनिक टिप्पणी। चिंता अक्सर ऐसे सिम्पैथेटिक तंत्र जैसी लगती है जो शांत होने को तैयार नहीं। अवसाद और थकान अक्सर ऐसे तंत्र जैसे लगते हैं जो उठने को तैयार नहीं।

## 3.4 मस्तिष्क की लचीलापन क्षमता (प्लास्टिसिटी)

न्यूरोप्लास्टिसिटी जीवन भर बदलने और ढलने की मस्तिष्क की क्षमता है। इसका अर्थ है:

-

नए तंत्रिका-संपर्क बन सकते हैं।

-

मस्तिष्क चोट से उबर सकता है।

-

सीखना मस्तिष्क की संरचना को बदलता है।

-

थेरेपी सोच के ढर्रों को नए सिरे से जोड़ सकती है।

-

अभ्यास से आदतें बदली जा सकती हैं।

इसीलिए उपचार, थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव मानसिक स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं।

#### और गहराई से

मस्तिष्क बदल सकता है, पर इसमें समय और अभ्यास लगता है। नींद, गतिविधि, अभ्यास और कभी-कभी दवा — इन्हीं से मानचित्र फिर से बनते हैं। स्ट्रोक के बाद पुनर्वास की योजना और CBT का गृहकार्य, दोनों ही प्लास्टिसिटी की परियोजनाएँ हैं।

## 3.5 संदेशवाहक

न्यूरॉन डेंड्राइट पर संदेश लेता है, सोमा में उन्हें जोड़ता है, और एक्सॉन से होकर “पूरा-या-कुछ नहीं” वाला एक्शन पोटेंशियल भेजता है। सिनैप्स पर रसायन बोलते हैं। कोई अकेला रसायन किसी मनोदशा के बराबर नहीं है।

**चित्र 3.4** *एक न्यूरॉन और उसका सिनैप्स।*

-

>

न्यूरॉन की संरचना: डेंड्राइट, सोमा, एक्सॉन, सिनैप्स।

-

एक्शन पोटेंशियल।

-

ग्लूटामेट (उत्तेजक)।

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GABA (निरोधक)।

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एसिटाइलकोलीन (गति, ध्यान, स्मृति)।

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डोपामिन (गति, प्रेरणा, पुरस्कार)।

-

सेरोटोनिन (मनोदशा, नींद, भूख, आवेग)।

-

नॉरएपिनेफ्रिन (उत्तेजना, सतर्कता)।

इन्हें यहाँ इसलिए सूचीबद्ध किया गया है क्योंकि ये जीवित मस्तिष्क के साथ जुड़े हैं।

## 3.6 अपने मस्तिष्क की देखभाल

आप साधारण, निःशुल्क आदतों से अपने मस्तिष्क की देखभाल कर सकते हैं:

1.

**चलें-फिरें।** नियमित शारीरिक गतिविधि रक्त-प्रवाह बढ़ाती है, नए संपर्कों को सहारा देती है और मनोदशा ऊपर उठाती है।

2.

**सोएँ।** नियमित समय रखें और अपनी नींद की रक्षा करें।

3.

**अच्छा खाएँ।** फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, मेवे, मछली और भरपूर पानी मस्तिष्क के स्वास्थ्य को सहारा देते हैं।

4.

**मानसिक रूप से सक्रिय रहें।** पढ़ना, पहेलियाँ, नए कौशल सीखना और बातचीत मस्तिष्क को लचीला रखते हैं।

5.

**जुड़े रहें।** सामाजिक संपर्क हर उम्र में मस्तिष्क के लिए अच्छा है।

6.

**तनाव संभालें।** विश्राम, शौक और विराम बोझ घटाते हैं।

7.

**अपने सिर की रक्षा करें।** हेलमेट और सीट-बेल्ट पहनें।

8.

**शराब सीमित करें और नशीली दवाओं से बचें।** ये मस्तिष्क के कार्य को नुकसान पहुँचाते हैं।

9.

**चिकित्सा जाँच करवाएँ।** रक्तचाप, रक्त-शर्करा और सुनने की क्षमता, सब मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

**इसे आज़माएँ: 4-6 श्वास**

आराम से बैठें। चार गिनने तक नाक से धीरे-धीरे साँस लें। छह गिनने तक मुँह से धीरे-धीरे साँस छोड़ें। दो मिनट तक दोहराएँ। लंबी साँस छोड़ना शरीर के शांत करने वाले तंत्र को सक्रिय करता है और तनाव-प्रतिक्रिया को स्थिर करता है। शांत होने पर रोज़ अभ्यास करें, ताकि तनाव में इसका उपयोग आसान हो।

## 3.7 एक कहानी

साधारण जीवन की एक कहानी — वह स्ट्रोक जिसने परिवार को शरीर-रचना सिखाई

बाईं ओर के स्ट्रोक के बाद एक दादी की बोली चली गई, पर गाना नहीं। रिश्तेदारों ने कहा कि वे ज़िद कर रही हैं। एक डॉक्टर ने ब्रोका क्षेत्र का नाम लिया। नाम देने से वे ठीक नहीं हुईं। पर अपमान रुक गया। पुनर्वास धीमा था। परिवार ने सीखा कि भाषा और गीत एक ही दराज़ में नहीं रहते — और यह कि नया “व्यक्तित्व” किसी घायल लोब का परिणाम भी हो सकता है।

साधारण जीवन की एक कहानी — हेलमेट वाली बहस

एक किशोर की नई बदतमीज़ी बिना हेलमेट स्कूटर से गिरने के बाद शुरू हुई। चाचाओं ने सम्मान पर भाषण देने की योजना बनाई। एक आपातकालीन डॉक्टर ने स्कैन की योजना बनाई। वह स्कैन फ़्रंटल लोब के प्रति सम्मान था।

## 3.8 एक सहयोगी श्लोक

इसी अध्याय की एक पुरानी तस्वीर: शरीर रथ है, मन लगाम है, बुद्धि सारथी है। यदि घोड़े बेक़ाबू हो जाएँ, तो रथ की जाँच करें — नींद, चोट, थायरॉइड — केवल सवार की नैतिकता की नहीं।

श्लोक / पद

**संस्कृत पाठ:**

आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव च ।

बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ॥

**उच्चारण:**

*atmanam rathinam viddhi sariram ratham eva ca |*

*buddhim tu sarathim viddhi manah pragraham eva ca ||*

**अनुवाद:** आत्मा को रथ का स्वामी, शरीर को रथ, बुद्धि को सारथी और मन को लगाम जानो।

**दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ:** मानसिक स्वास्थ्य के काम में रथ भी शामिल है। यदि धुरी टूटी हो, तो सवार को भाषण देना पर्याप्त नहीं है।

*संदर्भ — कठ उपनिषद 1.3.3–4*

**चित्र 3.5** *कठ उपनिषद का रथ: आत्मा सवार है, शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है, मन लगाम है और इंद्रियाँ घोड़े हैं।*

### चिंतन

1.

इस अध्याय का कौन-सा भाग किसी रिश्तेदार में देखी गई समस्या से सबसे अधिक मेल खाता है — आवेग, स्मृति, दृष्टि, अलार्म या नींद?

2.

आपके घर में कब किसी ने उस बात के लिए “रवैये” को दोष दिया जो शायद शरीर की कोई घटना थी?

3.

इस सप्ताह नींद या सुरक्षा की कौन-सी एक आदत केवल सवार की नहीं, रथ की भी मदद करेगी?

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