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# परिवार के सदस्य की मदद करना

*पहरेदारी के बिना प्रेम : भोजन, OPD की बुक की हुई मुलाक़ात, और एक व्यक्ति जो खुद भी सोता हो। दो देखभाल करने वाले एक नायक से बेहतर हैं।*

## 17.1 पारिवारिक सहारा क्यों मायने रखता है

परिवार के सदस्य, जीवनसाथी और करीबी मित्र अक्सर ठीक होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे व्यावहारिक मदद, भावनात्मक सहारा, उपचार के लिए प्रोत्साहन और अपनेपन की भावना देते हैं।

मानसिक बीमारी वाले किसी व्यक्ति का सहारा बनना भावनात्मक रूप से थका देने वाला हो सकता है। परिवारों को बिना बर्नआउट हुए प्रभावी ढंग से मदद करने के लिए जानकारी, कौशल और आत्म-देखभाल की ज़रूरत होती है।

## 17.2 व्यक्ति के अनुभव को समझना

व्यक्ति को “ठीक” करने की कोशिश से पहले यह समझना मदद करता है:

-

मानसिक विकार वास्तविक स्वास्थ्य-स्थितियाँ हैं, आलस, कमज़ोरी या किसी के सवार होने की बात नहीं।

-

व्यक्ति संभवतः पीड़ा में है, जानबूझकर कठिन नहीं बन रहा।

-

लक्षण (उदास मनोदशा, चिंता, गुस्सा, पीछे हटना, असामान्य मान्यताएँ) बीमारी का हिस्सा हैं, व्यक्ति का वास्तविक चरित्र नहीं।

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ठीक होना अक्सर धीरे-धीरे, उतार-चढ़ाव के साथ होता है।

सहानुभूति, धैर्य और सम्मान के साथ पेश आना टकराव घटाता है और भरोसा बढ़ाता है।

## 17.3 कैसे बात करें

#### समय और स्थान

ऐसा शांत, निजी समय चुनें जब आप दोनों अपेक्षाकृत सहज हों। बहस के दौरान, या जब व्यक्ति बहुत उत्तेजित, नशे में या थका हुआ हो, तब संवेदनशील मुद्दे न छेड़ें।

#### सहायक वाक्य

1.

मैंने देखा है कि आप हाल में बहुत तनाव में, उदास या थके हुए लगते हैं। मुझे आपकी परवाह है।

2.

आप अकेले नहीं हैं; हम मिलकर इसका सामना कर सकते हैं।

3.

मैं शायद पूरी तरह न समझूँ, पर मैं सुनना चाहता हूँ।

4.

क्या आप किसी डॉक्टर या परामर्शदाता से बात करने के लिए तैयार होंगे? मैं आपके साथ चल सकता हूँ।

#### अनुपयोगी वाक्य जिनसे बचें

1.

बस इससे बाहर निकलो।

2.

दूसरों की समस्याएँ इससे बड़ी हैं; तुम ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हो।

3.

यह सब तुम्हारे दिमाग़ में है; ज़्यादा सोचना बंद करो।

4.

अगर तुम और प्रार्थना करते / और कोशिश करते, तो ठीक रहते।

ऐसे वाक्य अपराध-बोध, शर्म और अकेलापन बढ़ा सकते हैं।

#### सुनना

1.

पूरा ध्यान दें; फ़ोन हटा दें।

2.

उन्हें बिना टोके बोलने दें।

3.

वापस दोहराएँ: लगता है कि आप अभिभूत और निराश महसूस कर रहे हैं।

4.

मान्यता दें: आप जिससे गुज़रे हैं, उसे देखते हुए आपका ऐसा महसूस करना समझ में आता है।

5.

समाधानों की ओर दौड़ने से बचें; कभी-कभी लोगों को सलाह से अधिक सुने जाने की ज़रूरत होती है।

## 17.4 पेशेवर मदद के लिए प्रोत्साहित करना

बहुत से लोग कलंक, डर या अंतर्दृष्टि की कमी के कारण मदद लेने का विरोध करते हैं।

-

मानसिक स्वास्थ्य और उपचार के बारे में सरल, तथ्यात्मक जानकारी बाँटें।

-

मदद माँगने को सामान्य बनाएँ: बहुत से लोग इससे गुज़रते हैं; किसी पेशेवर से बात करना सचमुच मदद कर सकता है।

-

व्यावहारिक सहारा दें: योग्य पेशेवर खोजें; साथ चलें; आने-जाने, बच्चों की देखभाल, काम से छुट्टी में मदद करें।

-

स्वायत्तता का सम्मान करें: जब तक नुकसान का तात्कालिक जोखिम न हो, ज़बरदस्ती से बचें। यदि वे मना करें, तो द्वार खुला रखें।

अंतर्दृष्टि की कमी वाली गंभीर बीमारी (मनोविकृति, गंभीर उन्माद) में परिवार को अधिक पहल करनी पड़ सकती है, आदर्श रूप से किसी मानसिक-स्वास्थ्य पेशेवर के मार्गदर्शन में।

## 17.5 घर पर उपचार को सहारा देना

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दवाएँ: लिखे अनुसार लेने में मदद करें (गोलियों का डिब्बा, याद-दिहानी); डॉक्टर की सलाह के बिना न बदलें, न बंद करें; दुष्प्रभावों पर नज़र रखें और बताएँ।

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थेरेपी: उपस्थिति और कौशल के अभ्यास के लिए प्रोत्साहित करें; थेरेपिस्ट के काम को कमज़ोर न करें।

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दिनचर्या: नियमित नींद, भोजन और गतिविधि को सहारा दें; धीरे से प्रोत्साहित करें, मजबूर न करें।

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तनाव में कमी: अनावश्यक टकराव और आलोचना घटाएँ; शांत, अनुमानित वातावरण बनाएँ।

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निगरानी: दोबारा बीमार होने के संकेतों (नींद में बदलाव, मनोदशा में उतार-चढ़ाव, पीछे हटना, असामान्य मान्यताएँ) पर नज़र रखें; उपचार करने वाले पेशेवर से जल्दी संपर्क करें।

## 17.6 घर पर संकट को सँभालना

यदि व्यक्ति गंभीर रूप से उत्तेजित, मनोविकृत, आत्मघाती या हिंसक हो जाए:

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शांत रहें: धीरे, आराम से, सम्मान के साथ बोलें। भ्रम या मतिभ्रम पर बहस न करें; भावनाओं और सुरक्षा पर ध्यान दें।

-

सुरक्षा सुनिश्चित करें: संभव हो तो ख़तरनाक वस्तुएँ हटा दें; यदि व्यक्ति आक्रामक हो तो सुरक्षित दूरी रखें; जब तक बिल्कुल ज़रूरी और सुरक्षित न हो, शारीरिक रूप से न रोकें।

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मदद लें: उपचार करने वाले मनोचिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। यदि नुकसान का तात्कालिक जोखिम हो, तो आपातकालीन सेवाएँ या निकटतम अस्पताल। अन्य भरोसेमंद परिवारजनों या मित्रों को सूचित करें।

-

संकट के बाद: शांत होने पर धीरे से बात करें; उत्तेजक कारणों की समीक्षा करें; एक संकट-योजना पर विचार करें (किसे फ़ोन करना है, कौन-सा अस्पताल, कौन-सी दवाएँ)।

## 17.7 परिवार के भीतर कलंक घटाना

परिवार अनजाने में कलंक को मज़बूत कर सकते हैं: व्यक्ति को दोष देकर, खुद को अत्यधिक दोष देकर, स्थिति को सबसे छिपाकर, या अपमानजनक ठप्पों का प्रयोग करके।

सहायक दृष्टिकोण: सम्मानजनक, व्यक्ति-प्रथम भाषा (“अवसाद वाला व्यक्ति”, न कि “अवसादी”); परिवार के सभी सदस्यों को शिक्षित करें; भरोसेमंद रिश्तेदारों के साथ चुनकर पर ईमानदारी से जानकारी बाँटें; पारिवारिक सहायता-समूहों से जुड़ें।

## 17.8 विशेष बातें

#### बच्चे और किशोर

जहाँ उचित हो, उपचार में माता-पिता या अभिभावकों को शामिल करें; स्कूल-परामर्शदाताओं या शिक्षकों के साथ तालमेल रखें; दिनचर्या बनाए रखें; बुलिंग, पढ़ाई के दबाव और सामाजिक समस्याओं पर नज़र रखें।

#### वृद्ध

अवसाद, चिंता और संज्ञानात्मक बदलावों के प्रति सतर्क रहें; सुनिश्चित करें कि चिकित्सीय समस्याओं का समाधान हो; साथ और सार्थक गतिविधियाँ दें; देखभाल करने वालों को विश्राम और जानकारी से सहारा दें।

#### नशीले पदार्थों का उपयोग

बढ़ावा देने (इनेबलिंग) से बचें (ऐसा पैसा देना जो नशीले पदार्थों पर ख़र्च हो सकता है, परिणामों पर पर्दा डालना)। उपचार के लिए प्रोत्साहित करें। स्पष्ट, करुणामय सीमाएँ तय करें। विशेष सहारा लें (नशा-मुक्ति केंद्र, पारिवारिक सहायता-समूह)।

## 17.9 देखभाल करने वाले की देखभाल

देखभाल करने वाले के बर्नआउट के संकेत: लगातार थकान; चिड़चिड़ापन, गुस्सा या आक्रोश; नींद की समस्याएँ; अपने स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन की उपेक्षा; निराश या फँसा हुआ महसूस करना।

आत्म-देखभाल: नियमित विराम; ज़िम्मेदारियाँ बाँटें; अपना स्वास्थ्य बनाए रखें; मित्रों और सहायता-समूहों से जुड़े रहें; अपने लिए परामर्श पर विचार करें। अपनी देखभाल करना स्वार्थ नहीं है; इससे आप दूसरों की बेहतर देखभाल कर पाते हैं।

## 17.10 कष्ट में पड़े व्यक्ति की मदद के पाँच कदम

जब आपका कोई परिचित संघर्ष कर रहा हो, तो पाँच सरल कदम आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं:

**चित्र 17.1 कष्ट में पड़े व्यक्ति की मदद के पाँच कदम।**

**कदम** | **क्या करें** |

संपर्क करें और ख़तरे की जाँच करें | बातचीत शुरू करें; आत्महत्या के विचारों या ख़तरे की जाँच करें |
बिना आँके सुनें | सम्मान के साथ उनकी पूरी बात सुनें |
सांत्वना और स्पष्ट जानकारी दें | आश्वस्त करें, स्थिति और उपचार के बारे में जानकारी बाँटें |
पेशेवर तक पहुँचने में उनकी मदद करें | डॉक्टर या परामर्शदाता का सुझाव दें; मुलाक़ात तय करने या साथ चलने की पेशकश करें |
उनके आसपास अन्य सहारा बनाएँ | परिवार, मित्र, साथी-समूह, स्वयं-सहायता, स्वस्थ दिनचर्या |

## 17.11 एक सरल कहानी

साधारण जीवन की एक कहानी — सुरेश और मीना

सप्ताहों तक मीना जैसे दूर खिसकती जा रही थी। वह पूरी तरह अपने में सिमट गई, अक्सर रोती, और बहुत चिड़चिड़ी रहती। उसने खाना बनाना बंद कर दिया, काम से छुट्टियाँ लेने लगी, और रात भर करवटें बदलती रहती। शुरू में उसके पति सुरेश को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। उसके व्यवहार को उसका चुनाव मानकर उसने सोचा कि वह बस अड़ियल या आलसी हो रही है। झुंझलाहट बढ़ी, और उनका घर लगातार बहसों वाला तनावपूर्ण वातावरण बन गया।

मोड़ तब आया जब सुरेश ने क्लिनिकल अवसाद के लक्षणों के बारे में पढ़ने का समय निकाला। अचानक जैसे बत्ती जल गई। उसे एहसास हुआ कि उसकी पत्नी उससे नहीं लड़ रही थी—वह एक गंभीर, थका देने वाली बीमारी से लड़ रही थी।

उसने अपना दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। अधूरे घरेलू कामों पर एक और बहस छेड़ने के बजाय वह बैठा और उससे धीरे से बोला: *“मैं देख रहा हूँ कि तुम पीड़ा में हो। मैं तुम्हारे साथ हूँ। चलो, साथ मिलकर किसी डॉक्टर से बात करते हैं।”* क्योंकि उसे आख़िरकार आँके जाने के बजाय समझा और सहारा दिया गया महसूस हुआ, इसलिए रक्षा की दीवार गिर गई, और मीना मदद लेने के लिए तैयार हो गई।

उचित चिकित्सीय उपचार से भारी कोहरा धीरे-धीरे छँटने लगा। पर उसके ठीक होने की असली नींव घर पर बनी। सुरेश ने ठीक होने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। उसने तुरंत आँके बिना या उसके विचारों को “ठीक” करने की कोशिश किए बिना बस उसे सुनना सीखा। उसने उसे आराम के लिए शारीरिक जगह देने हेतु घर के काम सँभाल लिए, उसकी रोज़ की दवाओं में मदद की, और खुद को और शिक्षित करने के लिए एक पारिवारिक सहायता-समूह भी जॉइन किया।

**मूल सीख**

सुरेश ने मानसिक बीमारी का सामना कर रहे किसी भी परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण सीखों में से एक सीखी। जब हम किसी बीमारी को नहीं समझते, तो हम आसानी से उसके लक्षणों, जैसे अचानक चिड़चिड़ापन, रुचि की कमी और गहरी थकान, को बुरा रवैया या कमज़ोर चरित्र समझ लेते हैं। जब सुरेश ने बीमारी को समझा, तो उसने मीना को विरोधी के रूप में देखना छोड़ दिया और उसका सबसे मज़बूत सहारा बन गया।

## 17.12 एक सहयोगी श्लोक

श्लोक / पद

**मूल पाठ:**

जे का रंजले गांजले । त्यासी म्हणे जो आपुले ।

तोचि साधू ओळखावा । देव तेथेचि जाणावा ॥

**उच्चारण:**

*je ka ranjale ganjale | tyasi mhane jo apule |*

*tochi sadhu olakhava | dev tethechi janava ||*

**अनुवाद:**

जो व्यक्ति टूटे और पीड़ित लोगों को अपना परिवार मानता है, वही सच्चा संत है। वहीं ईश्वर का वास है।

**दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ:**

संत तुकाराम का यह गहरा अभंग मानसिक-स्वास्थ्य देखभाल में पारिवारिक सहारे का परम सार व्यक्त करता है। जब कोई प्रियजन गंभीर अवसाद, चिंता या आघात से “कुचला” हुआ हो, तो सच्ची देखभाल का अर्थ है झुंझलाहट में उसे दूर धकेलने के बजाय उसकी ओर बढ़ना और उसकी पीड़ा को अपना मानना। यह अभंग पारिवारिक सहारे के इस रोज़मर्रा के कार्य को सर्वोच्च आध्यात्मिक साधना का दर्जा देता है।

फिर भी, किसी को अपना मानने के साथ कड़ी सीमाएँ आती हैं। यह उन्हें कठोर उपदेश देने, उनके लक्षणों के लिए डाँटने, या उन्हें “बस ख़ुश हो जाओ” के लिए मजबूर करने का लाइसेंस नहीं है। इसके अलावा, पारिवारिक प्रेम को कभी शर्म के कारण किसी गंभीर बीमारी को बाहरी दुनिया से छिपाने के बहाने के रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए। पीड़ितों को अपना मानने का अर्थ है उनके साथ खड़े रहना और उनसे इतना प्रेम करना कि जब उन्हें डॉक्टर की सख़्त ज़रूरत हो, तो आप उन्हें क्लिनिक या अस्पताल के द्वार तक ले जाएँ।

*संदर्भ — तुकाराम गाथा; पहली पंक्ति से उद्धृत करें*

### चिंतन गतिविधि

1.

अपने आसपास किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें जो संघर्ष कर रहा हो। आपने कौन-से संकेत देखे हैं?

2.

इस सप्ताह आप एक कौन-सा सहायक कदम उठा सकते हैं?

3.

यदि आप देखभाल करने वाले हैं, तो इस सप्ताह आप अपने स्वास्थ्य के लिए एक क्या कर सकते हैं?

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