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# आघात, शोक और क्षति

*घटना समाप्त होने के बाद जो रह जाता है : शोक नए काल में व्यक्त प्रेम है। आघात वह है जो तंत्रिका-तंत्र ने सीखा।*

## 10.1 आघात और हानि क्यों मायने रखते हैं

जीवन में कठिन अनुभव शामिल हैं: दुर्घटनाएँ, हिंसा, दुर्व्यवहार, आपदाएँ, अचानक मृत्यु, संबंध टूटना, नौकरी छूटना, बीमारी और हानि के अन्य रूप। ऐसी घटनाएँ मन, शरीर, संबंधों और सुरक्षा की भावना को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं।

आघात और शोक को समझना लोगों को सामान्य प्रतिक्रियाएँ पहचानने, समय पर सहारा लेने और अनावश्यक आत्म-दोष से बचने में मदद करता है।

## 10.2 आघात (ट्रॉमा) क्या है?

आघात ऐसे अनुभव को कहते हैं जो भावनात्मक रूप से दर्दनाक, कष्टदायक या जीवन के लिए ख़तरनाक हो, और उस समय व्यक्ति की सामना करने की क्षमता पर भारी पड़ जाए।

आघात देने वाली घटनाओं के प्रकारों में शामिल हो सकते हैं:

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शारीरिक या यौन दुर्व्यवहार।

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घरेलू हिंसा।

-

युद्ध, संघर्ष, आतंकवाद या विस्थापन।

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गंभीर दुर्घटनाएँ (सड़क दुर्घटनाएँ, औद्योगिक दुर्घटनाएँ)।

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प्राकृतिक आपदाएँ (भूकंप, बाढ़, आग)।

-

प्रियजनों की अचानक या हिंसक मृत्यु।

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चिकित्सीय आघात (जानलेवा बीमारी, आघातपूर्ण प्रसव, गहन चिकित्सा इकाई के अनुभव)।

-

सामुदायिक हिंसा या बुलिंग।

## 10.3 आघात की आम प्रतिक्रियाएँ

प्रतिक्रियाएँ भावनात्मक, शारीरिक, संज्ञानात्मक और व्यवहारगत हो सकती हैं।

**क्षेत्र** | **इस पुस्तक से** |

भावनात्मक | सदमा, सुन्नता, अविश्वास; डर, चिंता, घबराहट; उदासी, रोना, शोक; गुस्सा, चिड़चिड़ापन, क्रोध; अपराध-बोध या शर्म; भावनात्मक उतार-चढ़ाव |
शारीरिक | अनिद्रा, बुरे सपने; थकान; सिरदर्द, शरीर में दर्द, पेट की समस्याएँ; धड़कन बढ़ना, साँस फूलना, चक्कर; आसानी से चौंक जाना |
संज्ञानात्मक | अनचाही स्मृतियाँ या छवियाँ; बुरे सपने; ध्यान लगाने या याद रखने में कठिनाई; भ्रम या धुंधलापन महसूस करना; नकारात्मक मान्यताएँ (“संसार पूरी तरह असुरक्षित है”, “मैं स्थायी रूप से टूट गया हूँ”) |
व्यवहारगत | याद दिलाने वाली चीज़ों से बचना; पीछे हटना; शराब, तंबाकू या अन्य पदार्थों का बढ़ा हुआ उपयोग; बेचैनी; काम, स्कूल, आत्म-देखभाल फिर से शुरू करने में कठिनाई |

## 10.4 पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)

कुछ लोगों में आघात की प्रतिक्रियाएँ बनी रहती हैं और PTSD में विकसित हो जाती हैं। PTSD में आमतौर पर लक्षणों के चार समूह होते हैं जो एक महीने से अधिक चलते हैं और उल्लेखनीय हानि पैदा करते हैं।

#### घुसपैठ (इंट्रूज़न)

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आघात की अनचाही, कष्टदायक स्मृतियाँ।

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बुरे सपने।

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फ़्लैशबैक (ऐसा महसूस होना मानो घटना फिर से हो रही है)।

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याद दिलाने वाली चीज़ों पर तीव्र भावनात्मक या शारीरिक प्रतिक्रियाएँ।

#### टालना

आघात की याद दिलाने वाले विचारों, भावनाओं, बातचीत, जगहों, लोगों या गतिविधियों से बचना।

#### विचारों और मनोदशा में नकारात्मक बदलाव

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स्वयं, दूसरों या संसार के बारे में लगातार नकारात्मक मान्यताएँ।

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स्वयं को या दूसरों को अत्यधिक दोष देना।

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लगातार डर, भय, गुस्सा, अपराध-बोध या शर्म।

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गतिविधियों में रुचि की कमी।

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दूसरों से कटा हुआ महसूस करना।

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सकारात्मक भावनाएँ अनुभव करने में कठिनाई।

#### अति-उत्तेजना और प्रतिक्रियाशीलता

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चिड़चिड़ापन या गुस्से के विस्फोट।

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लापरवाह या आत्म-विनाशकारी व्यवहार।

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अति-सतर्कता (हमेशा चौकन्ना रहना)।

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अत्यधिक चौंकने की प्रतिक्रिया।

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ध्यान लगाने में कठिनाई।

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नींद में गड़बड़ी।

PTSD आघात के तुरंत बाद या महीनों या वर्षों बाद हो सकता है। विशेष थेरेपी से और ज़रूरत पड़ने पर दवाओं से इसका उपचार संभव है।

## 10.5 जटिल आघात और जटिल PTSD

जटिल आघात बार-बार या लंबे समय तक होने वाले आघातपूर्ण अनुभवों को कहते हैं, अक्सर बचपन में या ऐसी स्थितियों में जहाँ निकलना कठिन हो (दीर्घकालिक दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा, क़ैद, युद्ध)।

प्रभावों में शामिल हो सकते हैं:

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भावनाओं को नियंत्रित करने में गंभीर कठिनाइयाँ (तीव्र गुस्सा, दीर्घकालिक ख़ालीपन, विलगाव)।

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नकारात्मक आत्म-छवि (बेकार, टूटा हुआ या स्थायी रूप से अलग महसूस करना)।

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संबंधों में कठिनाइयाँ (भरोसे की समस्याएँ, अलगाव, बार-बार असुरक्षित संबंध)।

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विलगाव (डिसोसिएशन) (शरीर या वास्तविकता से कटा हुआ महसूस करना, स्मृति में खाली जगहें)।

कुछ वर्गीकरण-प्रणालियाँ जटिल PTSD का वर्णन करती हैं, जिसमें PTSD के मूल लक्षणों के साथ ये अतिरिक्त कठिनाइयाँ शामिल होती हैं। उपचार के लिए अक्सर लंबी अवधि की, आघात-जानकार थेरेपी चाहिए।

## 10.6 शोक और वियोग

शोक हानि की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, विशेषकर किसी प्रियजन की मृत्यु पर, पर अन्य हानियों पर भी (संबंध टूटना, स्वास्थ्य, नौकरी, घर, पहचान खोना)।

**चित्र 10.1** *शोक लहरों में आता है, सीधी रेखा में नहीं।*

शोक की आम प्रतिक्रियाओं में शामिल हैं: सदमा और अविश्वास; गहरी उदासी, रोना, तड़प; स्वयं, दूसरों, भाग्य या दिवंगत पर भी गुस्सा; अपराध-बोध या पछतावा; भविष्य की चिंता; शारीरिक लक्षण (थकान, नींद, भूख, दर्द); ध्यान लगाने या निर्णय लेने में कठिनाई।

शोक अक्सर लहरों में आता है। कुछ दिन आसान लगते हैं; कुछ भारी। सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान (अंतिम संस्कार, प्रार्थना, स्मृति-सभाएँ, श्राद्ध, चर्च की प्रार्थना-सभाएँ) ढाँचा, सहारा और अर्थ दे सकते हैं।

#### सामान्य शोक बनाम जटिल शोक

सामान्य (सरल) शोक: तीव्र पीड़ा, विशेषकर शुरुआती महीनों में; धीरे-धीरे कम भारी होता जाता है; व्यक्ति फिर भी आनंद या जुड़ाव के क्षण अनुभव कर सकता है; धीरे-धीरे दैनिक गतिविधियाँ और संबंध फिर शुरू करता है।

जटिल या लंबा शोक: शोक कई महीनों या वर्षों तक तीव्र बना रहता है और कम नहीं होता। व्यक्ति को कामकाज में कठिनाई होती है, वह हानि को स्वीकार नहीं कर पाता, और तीव्र तड़प, कड़वाहट या ख़ालीपन महसूस करता है। इसके साथ अवसाद, PTSD या नशीले पदार्थों का उपयोग हो सकता है। शोक-परामर्श, थेरेपी और कभी-कभी अवसाद या चिंता की दवा बहुत मदद कर सकती है।

## 10.7 आघात, शोक और मस्तिष्क

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एमिग्डाला: अति-सक्रिय हो सकता है, जिससे डर और सतर्कता बढ़ती है।

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हिप्पोकैम्पस: प्रभावित हो सकता है, जिससे स्मृति की कठिनाइयाँ और आघात की टुकड़ों में बँटी स्मृतियाँ होती हैं।

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प्रीफ़्रंटल कॉर्टेक्स: भावनाओं का नियंत्रण और तार्किक सोच घट सकती है।

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तनाव-हार्मोन: दीर्घकालिक उच्च कोर्टिसोल नींद, मनोदशा और शारीरिक स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है।

थेरेपी, सुरक्षा, सहारा देने वाले संबंध और समय मस्तिष्क और शरीर को उबरने में मदद कर सकते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी का अर्थ है कि ठीक होना और पुनर्गठन संभव है।

**चित्र 10.2** *सहनशीलता की खिड़की (विंडो ऑफ़ टॉलरेंस)।*

## 10.8 आघात-जानकार देखभाल

आघात-जानकार देखभाल यह पहचानती है कि आघात कितना आम है और यह लोगों को कैसे प्रभावित करता है। मुख्य सिद्धांत:

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सुरक्षा (शारीरिक और भावनात्मक)।

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विश्वसनीयता और पारदर्शिता।

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साथियों का सहारा और जुड़ाव।

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सहयोग और साझा निर्णय।

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सशक्तिकरण और चुनाव का अधिकार।

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सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लैंगिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता।

पेशेवर दोबारा आघात पहुँचाने वाले तरीकों से बचते हैं, प्रक्रियाएँ स्पष्ट रूप से समझाते हैं, सीमाओं का सम्मान करते हैं और व्यक्ति को सशक्त बनाते हैं। यह मानसिक-स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा-देखभाल, स्कूलों और अन्य प्रणालियों में मायने रखता है।

## 10.9 आघात और हानि से ठीक होना

ठीक होने का अर्थ भूल जाना नहीं है; इसका अर्थ है अनुभव को इस तरह आत्मसात करना कि वह दैनिक जीवन को नियंत्रित न करे।

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सुरक्षा और स्थिरता: सुरक्षित वातावरण, बुनियादी ज़रूरतें पूरी, अनुमानित दिनचर्या।

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सहारा देने वाले संबंध: भरोसेमंद परिवार, मित्र, समुदाय, सहायता-समूह।

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थेरेपी: आघात-केंद्रित CBT; EMDR (आई मूवमेंट डिसेंसिटाइज़ेशन एंड रीप्रोसेसिंग); नैरेटिव एक्सपोज़र थेरेपी; अन्य आघात-जानकार दृष्टिकोण।

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शरीर-आधारित अभ्यास: साँस, ग्राउंडिंग, योग, हल्की गतिविधि, सैर; नींद और पोषण का सहारा।

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अर्थ खोजना: आध्यात्मिक अभ्यास, प्रार्थना, अनुष्ठान; डायरी लिखना, कला, संगीत; तैयार होने पर समान अनुभव वाले दूसरों की मदद करना।

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ज़रूरत पड़ने पर दवाएँ: गंभीर अवसाद, चिंता, PTSD के लक्षणों या नींद की समस्याओं के लिए, मनोचिकित्सकीय देखरेख में।

ठीक होना अक्सर सीधी रेखा में नहीं होता: अच्छे दिन और बुरे दिन हो सकते हैं। धैर्य और सहारा अत्यंत आवश्यक हैं।

## 10.10 बच्चे और किशोर

बच्चे: पीछे लौटना (बिस्तर गीला करना, चिपके रहना, तुतलाना); ऐसा खेल जो आघात के विषयों को दोहराए; बुरे सपने, नींद की समस्याएँ; चिड़चिड़ापन, ज़िद, स्कूल से इनकार; शारीरिक शिकायतें।

किशोर: जोखिम भरे व्यवहार (नशीले पदार्थ, लापरवाह ड्राइविंग); आत्म-क्षति; गुस्सा, परिवार से टकराव; मित्रों और गतिविधियों से पीछे हटना; पढ़ाई में गिरावट।

## 10.11 पेशेवर मदद कब लें

-

आघात या शोक की प्रतिक्रियाएँ सप्ताहों और महीनों में गंभीर, लगातार या बिगड़ती हुई हों।

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दैनिक कामकाज (काम, पढ़ाई, आत्म-देखभाल, संबंध) उल्लेखनीय रूप से बाधित हो।

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आत्म-क्षति, आत्महत्या या दूसरों को नुकसान पहुँचाने के विचार हों।

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सामना करने के लिए शराब या ड्रग्स पर भारी निर्भरता हो।

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फ़्लैशबैक, बुरे सपने या टालना जीवन पर हावी हो रहे हों।

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परिवार या मित्र गंभीर चिंता जताएँ।

मदद मनोचिकित्सकों, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों, आघात में प्रशिक्षित परामर्शदाताओं और सामुदायिक सहायता-सेवाओं से मिल सकती है। आपात स्थिति में (नुकसान का तात्कालिक जोखिम), तुरंत चिकित्सीय और मनोचिकित्सकीय देखभाल चाहिए।

## 10.12 तीव्र तनाव विकार और समायोजन की समस्याएँ

आघात के बाद पहले महीने में शुरू होने वाली और तीन दिन से एक महीने तक चलने वाली प्रबल प्रतिक्रियाओं को **तीव्र तनाव विकार (एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर)** कहते हैं। बहुत से लोग बिना स्थायी समस्याओं के ठीक हो जाते हैं। जिनके लक्षण एक महीने से आगे बने रहते हैं, उन्हें PTSD हो सकता है।

## 10.13 बचपन की प्रतिकूलताएँ

बचपन के कठिन अनुभव, जैसे दुर्व्यवहार, उपेक्षा, घर में हिंसा, गंभीर मानसिक बीमारी या लत वाले माता-पिता, या माता-पिता का अलग होना, वयस्क जीवन में अवसाद, चिंता, लत और शारीरिक बीमारी का जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसे अनुभव जितने अधिक, जोखिम उतना अधिक। पर यह नियति नहीं है। देखभाल करने वाला कोई वयस्क, स्थिर स्कूल, मित्रता और बाद में थेरेपी, सभी बच्चों की रक्षा करते हैं और वयस्कों को उबरने में मदद करते हैं।

बच्चे आघात पर वयस्कों से अलग प्रतिक्रिया देते हैं। छोटे बच्चे पीछे लौट सकते हैं (बिस्तर गीला करना, चिपके रहना), खेल में घटनाएँ दोहरा सकते हैं, बुरे सपने देख सकते हैं, या पेट दर्द की शिकायत कर सकते हैं। किशोर गुस्सा, जोखिम लेना या पीछे हटना दिखा सकते हैं। बच्चों को सुरक्षा, दिनचर्या, ईमानदार सरल व्याख्याएँ और यह आश्वासन चाहिए कि उसमें उनकी गलती नहीं थी।

## 10.14 PTSD होने की अधिक संभावना किसमें होती है?

जोखिम अधिक होता है जब:

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आघात गंभीर, लंबा या किसी दूसरे व्यक्ति के कारण हुआ हो

-

पहले के आघात या बचपन की प्रतिकूलताओं का इतिहास हो

-

व्यक्ति घायल हुआ हो या उसे अपनी जान का डर लगा हो

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बाद में सहारे की कमी रही हो

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पहले से कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या रही हो

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घटना के बाद लगातार तनाव रहा हो (जैसे घर या आय का छिन जाना)

सुरक्षात्मक कारकों में सामाजिक सहारा, बाद में सुरक्षित महसूस करना, बात करने के लिए कोई होना, और देखभाल तक पहुँच शामिल हैं।

## 10.15 कारगर उपचार

आघात के उपचार मानसिक स्वास्थ्य में सबसे अधिक शोधित उपचारों में से हैं, और परिणाम उत्साहजनक हैं। आघात-केंद्रित थेरेपी अधिकांश लोगों की मदद करती हैं।

### आघात-केंद्रित CBT (संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी)

लोगों को अपनी प्रतिक्रियाएँ समझने, शांत होने के कौशल सीखने, सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे स्मृतियों और याद दिलाने वाली चीज़ों का सामना करने, और आघात के बारे में अनुपयोगी मान्यताओं, जैसे अनुचित आत्म-दोष, को बदलने में मदद करती है।

### प्रोलॉन्ग्ड एक्सपोज़र थेरेपी

CBT का एक संरचित रूप जिसमें व्यक्ति थेरेपिस्ट के मार्गदर्शन में सावधानी से और धीरे-धीरे स्मृति और टाली गई स्थितियों पर लौटता है, जब तक वे अपनी शक्ति न खो दें।

### कॉग्निटिव प्रोसेसिंग थेरेपी

“अटके हुए बिंदुओं” को पहचानने और बदलने पर केंद्रित, यानी यह मान्यताएँ कि घटना क्यों हुई और उसका क्या अर्थ है।

### EMDR (आई मूवमेंट डिसेंसिटाइज़ेशन एंड रीप्रोसेसिंग)

व्यक्ति थेरेपिस्ट के निर्देशित नेत्र-संचालन या अन्य बारी-बारी की उत्तेजना का अनुसरण करते हुए आघात के हिस्सों को थोड़े समय के लिए याद करता है। कई स्वास्थ्य संगठन PTSD के लिए इसकी सलाह देते हैं। शोधकर्ता अभी भी इस पर चर्चा करते हैं कि यह ठीक-ठीक कैसे काम करती है।

### दवाएँ

सर्ट्रालीन और पैरोक्सेटीन जैसी SSRIs और SNRI वेनलाफ़ैक्सिन PTSD के लक्षण घटा सकती हैं और अक्सर थेरेपी के साथ प्रयोग की जाती हैं। कुछ दवाएँ विशेष समस्याओं, जैसे बुरे सपनों या नींद, के लिए प्रयोग की जा सकती हैं। डॉक्टर नींद लाने वाली दवाओं के लंबे उपयोग से बचने का ध्यान रखते हैं, जो आघात से उबरने में बाधा डाल सकता है।

### ठीक होने के चरण

बहुत से आघात-विशेषज्ञ तीन चरण बताते हैं:

1.

**सुरक्षा और स्थिरीकरण:** सुरक्षा बनाना, प्रबल भावनाओं को सँभालना सीखना और सहारा मज़बूत करना।

2.

**प्रक्रिया:** स्मृति और उसके अर्थ पर काम करना।

3.

**फिर से जुड़ना:** संबंध, उद्देश्य और भविष्य की भावना को फिर से बनाना।

## 10.16 आघातपूर्ण घटना के बाद क्या मदद करता है

यदि आप या आपका कोई परिचित अभी-अभी किसी डरावनी घटना से गुज़रा है:

1.

**सुरक्षित हों** और बुनियादी ज़रूरतें पूरी करें: भोजन, पानी, आराम और आश्रय।

2.

भरोसेमंद लोगों से **जुड़ें**। आपको विवरणों के बारे में बात करने की ज़रूरत नहीं, पर अलग-थलग न रहें।

3.

धीरे-धीरे **दिनचर्या पर लौटें**: नियमित भोजन, नींद और हल्की गतिविधि।

4.

**अपने प्रति कोमल रहें।** प्रबल प्रतिक्रियाएँ सामान्य हैं।

5.

**शराब और ड्रग्स सीमित करें।**

6.

घटना की ख़बरों या छवियों को **बार-बार देखना सीमित करें**।

7.

**तैयार होने पर बात करें।** खुद को या दूसरों को कहानी दोहराने के लिए मजबूर न करें। शुरुआती औपचारिक “डीब्रीफ़िंग”, जिसमें लोगों को घटनाएँ फिर से जीने के लिए धकेला जाता है, PTSD को रोकती हुई नहीं पाई गई है।

8.

**मदद लें** यदि लक्षण गंभीर हों, एक महीने से अधिक चलें, या आप असुरक्षित महसूस करें।

## 10.17 फ़्लैशबैक और अभिभूत करने वाली भावनाओं के लिए ग्राउंडिंग कौशल

ग्राउंडिंग ध्यान को वर्तमान में लौटाती है।

-

बोलें कि आप कहाँ हैं, आज की तारीख़ क्या है, और कि आप अब सुरक्षित हैं।

-

अपने पैरों को फ़र्श पर मज़बूती से दबाएँ।

-

कुछ ठंडा, खुरदुरा या भारी पकड़ें।

-

चारों ओर देखें और पाँच नीली चीज़ों के नाम लें।

-

धीरे-धीरे साँस छोड़ें।

-

खुद से कहें: “यह एक स्मृति है। यह अभी नहीं हो रहा।”

## 10.18 आघात से गुज़रे व्यक्ति का सहारा बनना

-

बिना आँके या विवरणों के लिए दबाव डाले **सुनें**।

-

उन पर **विश्वास करें**। “तुम चले क्यों नहीं गए?” जैसी दोष देने वाली टिप्पणियों से बचें।

-

**व्यावहारिक मदद दें:** भोजन, आने-जाने में मदद, बच्चों की देखभाल।

-

**उनकी गति का सम्मान करें** और बात करने के लिए मजबूर न करें।

-

**चिड़चिड़ेपन और पीछे हटने के प्रति धैर्य रखें।**

-

**पेशेवर तक पहुँचने में उनकी मदद करें** और मुलाक़ातों में साथ चलने की पेशकश करें।

-

**अपना भी ध्यान रखें**; सहारा देने वाले भी अभिभूत महसूस कर सकते हैं।

## 10.19 आघात के बाद विकास (पोस्ट-ट्रॉमैटिक ग्रोथ)

आघात पीड़ा लाता है, फिर भी बहुत से उत्तरजीवी समय के साथ सकारात्मक बदलाव भी बताते हैं: जीवन की गहरी कद्र, मज़बूत संबंध, अधिक व्यक्तिगत शक्ति, नई प्राथमिकताएँ और उद्देश्य की प्रबल भावना। इसे आघात के बाद विकास कहते हैं। यह आघात को “सार्थक” नहीं बनाता और ठीक होने के लिए आवश्यक भी नहीं है, पर यह दिखाता है कि लोग ठीक हो सकते हैं और अर्थ खोज सकते हैं।

**इसे आज़माएँ: सुरक्षित जगह की छवि**

आँखें बंद करें और ऐसी जगह की कल्पना करें जहाँ आप शांत और सुरक्षित महसूस करते हैं। वह वास्तविक या काल्पनिक हो सकती है: समुद्र-तट, कोई कमरा, कोई बगीचा। ध्यान दें कि आप क्या देखते, सुनते, सूँघते और महसूस करते हैं। धीमी साँस लेते हुए एक-दो मिनट वहीं रहें। रोज़ अभ्यास करें, ताकि तनाव महसूस होने पर आप इस छवि पर लौट सकें। यदि कल्पना कष्टदायक स्मृतियाँ जगाए, तो रुकें और इसके बजाय कोई ग्राउंडिंग अभ्यास करें, और थेरेपिस्ट से मार्गदर्शन लेने पर विचार करें।

## 10.20 एक सरल कहानी

साधारण जीवन की एक कहानी — अरुण, आयु 32

अरुण एक भयानक सड़क दुर्घटना में बच गया। कुछ सप्ताहों बाद उसकी टूटी हड्डियाँ जुड़ गईं और शरीर के निशान फीके पड़ गए, इसलिए सबने मान लिया कि वह पूरी तरह ठीक है। पर उसके मन के भीतर दुर्घटना कभी ख़त्म ही नहीं हुई थी।

महीनों तक उसके मस्तिष्क की जीवन-रक्षा वाली चेतावनी-घंटी “चालू” स्थिति में ही अटकी रही। वह बुरे सपनों से पसीने में तर होकर जागता। उसने गाड़ी चलाने या कार की अगली सीट पर बैठने से भी साफ़ मना कर दिया। दरवाज़ा ज़ोर से बंद होने जैसी कोई अचानक तेज़ आवाज़ उसके दिल को घोर घबराहट में दौड़ा देती। क्योंकि वह समझा नहीं पाता था कि वह इतना डरा हुआ क्यों है, वह खुद को दोष देने लगा, मित्रों से कटने लगा और काम छोड़ने लगा। आघात को न समझने वाला उसका परिवार फुसफुसाता कि वह बस कमज़ोर पड़ रहा है और उसे “आगे बढ़ जाना” चाहिए।

मोड़ तब आया जब एक करीबी मित्र ने संकेत पहचाने और धीरे से उसे एक आघात-जानकार थेरेपिस्ट के पास ले गया।

थेरेपिस्ट ने अरुण को नहीं आँका। इसके बजाय उन्होंने समझाया कि उसकी प्रतिक्रियाएँ कमज़ोरी का संकेत नहीं थीं—वे एक ऐसे तंत्रिका-तंत्र की सामान्य, जैविक प्रतिक्रियाएँ थीं जो उसे फिर से मरने से बचाने की कोशिश कर रहा था। शर्म को हटाना पहला कदम था। फिर कठिन काम आया: अरुण ने शारीरिक घबराहट को शांत करने के लिए साँस के अभ्यास सीखे, और धीरे-धीरे, सुरक्षित एक्सपोज़र थेरेपी के माध्यम से उसने पहले खड़ी कारों में बैठने का, फिर छोटी ड्राइव का अभ्यास किया, जब तक कि उसके मस्तिष्क ने अंततः यह नहीं समझ लिया कि ख़तरा अतीत में था।

**मूल सीख: आघात के बाद विकास**

अरुण की कहानी केवल सामान्य स्थिति में लौटने की नहीं है; यह उस बारे में है जिसे मनोवैज्ञानिक कहते हैं

**आघात के बाद विकास (पोस्ट-ट्रॉमैटिक ग्रोथ)**।

जब अरुण अंततः ठीक होकर सड़क पर लौटा, तो वह दुर्घटना से पहले वाला बिल्कुल वही व्यक्ति नहीं था। आघात से बचकर निकलने और थेरेपी का कठिन काम करने से उसे एक गहरी नई शक्ति मिली। उसमें जीवित होने की गहरी, समृद्ध कद्र विकसित हुई। वह दूसरों के अदृश्य संघर्षों के प्रति अत्यंत करुणामय हो गया, और मदद करने वाले मित्र के साथ उसका बंधन अटूट हो गया। आघात ने एक निशान छोड़ा, पर ठीक होने की प्रक्रिया ने एक अधिक मज़बूत, समझदार और गहराई से जुड़ा हुआ मनुष्य गढ़ा।

## 10.21 एक सहयोगी श्लोक

श्लोक / पद

**संस्कृत पाठ:** अविद्यास्मितारागद्वेषाभिनिवेशाः क्लेशाः ॥

**उच्चारण:** *avidya-asmita-raga-dvesa-abhinivesah klesah ||*

**अनुवाद:** क्लेश हैं: अविद्या, अस्मिता (अहं-भाव), राग (आसक्ति), द्वेष (विरोध) और अभिनिवेश (जीवन से चिपके रहना)।

**दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ:** ये पाँच *क्लेश* मानव-पीड़ा की गहरी जड़ें हैं। जब आप कोई गंभीर सदमा या आघात अनुभव करते हैं, तो आपका मन अक्सर अंतिम दो में फँस जाता है: *द्वेष* (दर्द की याद दिलाने वाली हर चीज़ से बचने की प्रबल इच्छा) और *अभिनिवेश* (जीवित रहने से गहरा, घबराया हुआ चिपकाव)।

किसी कठिन चोट के बाद यह तीव्र टालना और जीवन-रक्षा की घबराहट आपके तंत्रिका-तंत्र को महीनों या वर्षों तक उत्तेजित और अति-सतर्क रख सकती है। इन प्रतिक्रियाओं को नाम देना पहला कदम है, क्योंकि इससे आपको एहसास होता है कि आपका मन बस आपकी रक्षा करने की कोशिश कर रहा है। फिर भी, प्राचीन सूचियाँ आधुनिक चिकित्सा-देखभाल का विकल्प नहीं हैं। जब आपका तंत्रिका-तंत्र सचमुच अभिभूत हो, तो आघात में प्रशिक्षित चिकित्सक से न मिलने के बहाने के रूप में इस सूत्र का प्रयोग न करें।

*संदर्भ — पतंजलि योगसूत्र 2.3*

### चिंतन गतिविधि

1.

क्या आपने या आपके किसी परिचित ने कोई कठिन घटना अनुभव की है? आपने कौन-सी प्रतिक्रियाएँ देखीं?

2.

इस अध्याय का कौन-सा विचार (सामान्य शोक, PTSD, आघात-जानकार देखभाल, ठीक होने के कदम) सबसे अधिक सार्थक या नया था?

3.

एक सहायक कदम बताएँ जो आप शोक में डूबे या उबर रहे किसी व्यक्ति के लिए उठा सकते हैं (बिना आँके सुनना, कामों में मदद, पेशेवर मदद के लिए प्रोत्साहन, उनके साथ चलना)।

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